Saturday, January 15, 2011

भ्रष्टाचारी लोकतंत्र

देशभक्ति से ओतप्रोत मित्रों ने ४-५ दिन तक अपने विचारों को कविता के माध्यम से फेसबुक पे कुछ इस तरह व्यक्त किया..



Devendra:

चना चिरोंजी हो गए , हड्डी बनी अचार ,

कांग्रेज़ क राज्य में दल्ले बने पत्रकार.



Peeyush:

दल्ले बने पत्रकार..भैया कलयुग है ये घोर...!!

Zero tolerance .. थे जो कहते फिरते....वही निकल आये चोर...!!!



Sunil:

पत्रकार है दल्ला बेचे गली गली में देश !

नेता बनिया सांठ गाँठ कौन बचाए देश !!





Sunil:

नेहरु ने जो बोया बीज गांधी जी के नाम पर !

देश अभी तक ढो रहा गद्दारों को छाती पर !!



Sunil:

गद्दी पाने की साजिश में देश की लूटिया डूब चली है !

घोटालों के बारूदों में जल राह तरक्की भूल चली है !!





Peeyush:

कौन बचाए देश कि... यहाँ सब हैं चोर-चुहाड़ ....

चूस लिया है देश को...खूब किया खिलवाड़...!!



Sunil:

खूब किया खिलवाड़ की भैया आई ऐसी विपदा!

हुआ कलंकित देश है इन घोटालों में लिपटा!!



Peeyush:

वो जिनको नहीं कुछ लेना ..बापू जी के काम से ...

जोड़कर रखा है बिना बात के .. गाँधी अपने नाम से ...!!


Sunil:

समाचार को तोड़ तोड़ कर भरम ढेर फैलाया है !

चोरों से ही जांच कराकर चोरी खूब छिपाया है !!



Saurabh:

चोरी खूब छिपाया भैया, डाकूओ को मिली शाबाशी,

भ्रस्टाचारी को भारतवर्ष मे कभी न होगी फासी |



Sunil:

अजब खेल में है फंस गए सारे भारतवासी !

घोटाले के बाद भी न्याय में क्यूँ ख़ामोशी !!



Saurabh:

ख़ामोशी की बात न करो, आज हुंकार उठा बिहार हैं |

ओ लालू ओ राहुल बाबा, ये शोषित मानुष की मार हैं ||



Sunil:

चलो कहीं से फूटी हैं आशा की किरणे देश में!

घोर अँधेरा छट जायेगा ऐसे जन आक्रोशों से !!



Saurabh:

‎ अब भूल न जाना ऐ भारतवासी ये कांग्रेसी कमिसनखोरी ,

भारत माता पुकार रही हैं, अब तो बचा लो लाज मोरी |

माना मनमोहन के मन में, नहीं हैं निहित स्वार्थ ,

पर सत्ता लोलुपता में क्यों भुला दिया पुरुषार्थ |

... भुला दिया पुरुषार्थ, तो अब नचा रही हैं इतालवी छोरी,

10 जनपथ पे शीश झुका कहते हो, मैडम आई म सॉरी |



Sunil:

मनमोहन का निहित स्वार्थ तो सत्ता ही है भाई !

चिपक गए है कुर्सी से ये सोनिया जी (G) के हलुवाई !!



Sunil:

माता सोनिया के कहने से घोटाले करवाएंगे

चुप्पी ऐसी साधेंगे और माफ़ी भी मनवाएंगे



Peeyush:

अभागा ये देश है भैया ...जो ऐसे हैं लोग....

खा रहे हैं दीमक सा ...लगा रहे हैं रोग



Saurabh:

लगा ऐसा रोग की भैया, अब एक ही हैं इलाज ,

आओ मिल जुल के खतम करे , ये पाखंडी राज |



Peeyush:

ये पाखंडी राज...कि.. बिहार ने कर दिखलाया है ...

चोरो को ...लुटेरों को..जूते मार भगाया है...!!!



Saurabh:

जूते मार भगाया ऐसा की बूझ गयी लालटेन,

लालू जी डूबी लुटिया, लुट जाया सुख चैन |



Sunil:

कलमाड़ी ,राजा, चावन देश को गिरवी रखेंगे !

चंद पैसों की लालच में अपनी मां को बेचेंगे !!

कब जागेंगे देश के वासी इनको दूर भगायेंगे !

सोनिया को इटली लौटा पैसा स्विस से लायेंगे !!



Peeyush:

चवन, कलमाड़ी , राजा...सब कांग्रेस के सिपाही..

मिलकर.. देश के दामन पर...पोत रहे हैं स्याही..!!



Sunil:

कहने को जनतंत्र नाम है शासक सत्ता फिर क्यूँ है !

जब नेता सेवक कहलाते जनता शोषित फिर क्यूँ है !!



Saurabh:

आओ आपको आज सुनाये, एक खबर एकदम ताजा |

गुम होने लगे कानूनी कागज़, यार अब चैन से सोओ राजा ||



Peeyush:

सोनिया जब, बहु है उनकी .....फिर क्यूँ कसब को दामाद बनाया...

कांग्रेस में रिश्तों का तिकड़म ....यारों मुझको समझ न आया .....!!



Sunil:

भ्रष्टाचारी लोकतंत्र में जनता केवल मोहरा है !

जन पीड़ा अनुमान किसे, घाव बहुत ही गहरा है !!

भ्रष्टाचारी लोकतंत्र

देशभक्ति से ओतप्रोत मित्रों ने ४-५ दिन तक अपने विचारों को कविता के माध्यम से फेसबुक पे कुछ इस तरह व्यक्त किया..



Devendra:

चना चिरोंजी हो गए , हड्डी बनी अचार ,

कांग्रेज़ क राज्य में दल्ले बने पत्रकार.



Peeyush:

दल्ले बने पत्रकार..भैया कलयुग है ये घोर...!!

Zero tolerance .. थे जो कहते फिरते....वही निकल आये चोर...!!!



Sunil:

पत्रकार है दल्ला बेचे गली गली में देश !

नेता बनिया सांठ गाँठ कौन बचाए देश !!





Sunil:

नेहरु ने जो बोया बीज गांधी जी के नाम पर !

देश अभी तक ढो रहा गद्दारों को छाती पर !!



Sunil:

गद्दी पाने की साजिश में देश की लूटिया डूब चली है !

घोटालों के बारूदों में जल राह तरक्की भूल चली है !!





Peeyush:

कौन बचाए देश कि... यहाँ सब हैं चोर-चुहाड़ ....

चूस लिया है देश को...खूब किया खिलवाड़...!!



Sunil:

खूब किया खिलवाड़ की भैया आई ऐसी विपदा!

हुआ कलंकित देश है इन घोटालों में लिपटा!!



Peeyush:

वो जिनको नहीं कुछ लेना ..बापू जी के काम से ...

जोड़कर रखा है बिना बात के .. गाँधी अपने नाम से ...!!


Sunil:

समाचार को तोड़ तोड़ कर भरम ढेर फैलाया है !

चोरों से ही जांच कराकर चोरी खूब छिपाया है !!



Saurabh:

चोरी खूब छिपाया भैया, डाकूओ को मिली शाबाशी,

भ्रस्टाचारी को भारतवर्ष मे कभी न होगी फासी |



Sunil:

अजब खेल में है फंस गए सारे भारतवासी !

घोटाले के बाद भी न्याय में क्यूँ ख़ामोशी !!



Saurabh:

ख़ामोशी की बात न करो, आज हुंकार उठा बिहार हैं |

ओ लालू ओ राहुल बाबा, ये शोषित मानुष की मार हैं ||



Sunil:

चलो कहीं से फूटी हैं आशा की किरणे देश में!

घोर अँधेरा छट जायेगा ऐसे जन आक्रोशों से !!



Saurabh:

‎ अब भूल न जाना ऐ भारतवासी ये कांग्रेसी कमिसनखोरी ,

भारत माता पुकार रही हैं, अब तो बचा लो लाज मोरी |

माना मनमोहन के मन में, नहीं हैं निहित स्वार्थ ,

पर सत्ता लोलुपता में क्यों भुला दिया पुरुषार्थ |

... भुला दिया पुरुषार्थ, तो अब नचा रही हैं इतालवी छोरी,

10 जनपथ पे शीश झुका कहते हो, मैडम आई म सॉरी |



Sunil:

मनमोहन का निहित स्वार्थ तो सत्ता ही है भाई !

चिपक गए है कुर्सी से ये सोनिया जी (G) के हलुवाई !!



Sunil:

माता सोनिया के कहने से घोटाले करवाएंगे

चुप्पी ऐसी साधेंगे और माफ़ी भी मनवाएंगे



Peeyush:

अभागा ये देश है भैया ...जो ऐसे हैं लोग....

खा रहे हैं दीमक सा ...लगा रहे हैं रोग



Saurabh:

लगा ऐसा रोग की भैया, अब एक ही हैं इलाज ,

आओ मिल जुल के खतम करे , ये पाखंडी राज |



Peeyush:

ये पाखंडी राज...कि.. बिहार ने कर दिखलाया है ...

चोरो को ...लुटेरों को..जूते मार भगाया है...!!!



Saurabh:

जूते मार भगाया ऐसा की बूझ गयी लालटेन,

लालू जी डूबी लुटिया, लुट जाया सुख चैन |



Sunil:

कलमाड़ी ,राजा, चावन देश को गिरवी रखेंगे !

चंद पैसों की लालच में अपनी मां को बेचेंगे !!

कब जागेंगे देश के वासी इनको दूर भगायेंगे !

सोनिया को इटली लौटा पैसा स्विस से लायेंगे !!



Peeyush:

चवन, कलमाड़ी , राजा...सब कांग्रेस के सिपाही..

मिलकर.. देश के दामन पर...पोत रहे हैं स्याही..!!



Sunil:

कहने को जनतंत्र नाम है शासक सत्ता फिर क्यूँ है !

जब नेता सेवक कहलाते जनता शोषित फिर क्यूँ है !!



Saurabh:

आओ आपको आज सुनाये, एक खबर एकदम ताजा |

गुम होने लगे कानूनी कागज़, यार अब चैन से सोओ राजा ||



Peeyush:

सोनिया जब, बहु है उनकी .....फिर क्यूँ कसब को दामाद बनाया...

कांग्रेस में रिश्तों का तिकड़म ....यारों मुझको समझ न आया .....!!



Sunil:

भ्रष्टाचारी लोकतंत्र में जनता केवल मोहरा है !

जन पीड़ा अनुमान किसे, घाव बहुत ही गहरा है !!