Friday, July 24, 2009

हाँ जी, हम प्यार में हैं / अरुणा राय


हाँ जी, इन दिनों हमप्‍यार में हेंअब यह मत पूछिएगा किकिसकेहवाओं के चांदनी के यारेत केबस प्‍यार है और हमलिखते चल रहे हैं कोई नामजहाँ-तहाँ और उसके आजूबाजूलिख दे रहे हैं पवित्र मासूम निर्दोषऔर यह सोचते हैं कि येउसे ज़ाहिर कर देंगे याढक लेंगेआजकल कभी भी खटखटा देतेहैंएक दूसरे का हृदयऔर हड़बड़ाए से कहबैठते हैंलगता है बेवक़्त आ गएऔर ऐसा कहते हुए समातेचले जाते हैंएक दूसरे के भीतर
फिर अचानक ख़ुद कोसमेटतेचल देते हैं झटके सेकि फिर बात करते हैंकि एक पूछता हैअरे, आपका कुछ छूटा जारहा है यहाँकोई दिल-विल-सा तोनहीं
नहीं वह आपका ही हैमेरे तो किसी काम कानहीं
ऐसा कहता मन मसोसताझटके से छुपा लेता हैउसे मन
कभी यूँ ही बज उठता हैमोबाइलपता चलता है ग़लती से दबगया था नंबरकि घंटी बजती है दिमागकीवह लगता है चीख़नेसंभलो दिल दिल दिलकि हत्‍था मार बंद करताउसका हंगामा...



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