Friday, April 19, 2013

बढ़ते बलात्कार , सोती सरकार और संवेदनहीन समाज


न तो कैंडल मार्च और न आंदोलनों का कोई असर हुआ ..... न ही बहुत कड़े कानून बनाने से उनके दिमाग में असर गया ... क्योंकि उनके दिमाग में तो कुछ और ही भरा है ...जो आज समाज में सब जगह फिल्मों से लेकर इन्टरनेट और यहाँ तक आधुनिक मीडिया और समाचार पत्र परोसने में लगे है .. इन्टरनेट और फिल्मों की बात छोडिये आज इसमें सबसे बड़ा योगदान इन्टरनेट न्यूज़ मीडिया का भी है ...प्रश्न ये है कि लोग दिमाग के अन्दर बैठे उस वहसी जानवर को खाना -पानी देने वाले कारणों को रोकने की बात क्यों नहीं कर रहे है ... कारण को रोकने से ही ये अपराध रुकेंगे ... घर , समाज को पूरी तरह अब आगे आना होगा ...उसके साथ ही उस दिमाग के अन्दर बैठे वहशी जानवर को खाना -पानी देने वाले इन्टरनेट , फिल्मो , मीडिया में मौजूद उन सभी वाहको पर रोक लगानी होगी जो कि वास्तव में मनुष्य के दिमाग को अपाहिज कर देते है ...और उसका शिकार कोई और बन जाता है . सिर्फ आधुनिकता का रट्टा लगाकर और ये कहकर कि अरे वो तो छोटे कपडे नहीं पहने थी , वो तो रात में नहीं जा रही थी, वो तो बार,पार्टी में नहीं थी ...आदि कहकर पाश्चात्य गन्दगी का समर्थन करने से भी नहीं रुकने वाले है ....पहले ये भी देखना होगा क्या हमारा समाज उस पाश्चात्य आधुनिकता को स्वीकार करने लायक है भी की नहीं ...वास्तविकता ये है कि अभी बिलकुल नहीं है ..हमे अपनी सामाजिक व्यवस्था देश , धर्म ,समय और लोगों की मानसिक अवस्था को देखकर तय करनी होगी ...जिस देश के लोग अभी भी अशिक्षा , गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे हो, जिन्हें अनुशासन और नियम में रहने की आदत ही न ही ... उनके लिए पाश्चात्य सभ्यता सिर्फ एक अभिशाप ही है ..और ये सब उसी का परिणाम है . लोग अभी भी नैतिक रूप से अशिक्षित है ...और पाश्चात्य सभ्यता स्वीकार करने योग्य नहीं है अक्सर जो कारण होते है उनसे अपाहिज और अँधा दिमाग शिकार किसी और को बनाता है ....क्योकि तब उसके दिमाग में वही होता है जो वो इन्टनेट , फिल्मों में देखता है और टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,आज तक , इंडिया टुडे , नवभारत टाइम्स न्यूज़ पोर्टल में प्रत्येक दिन देने वाली सलाहों को सीखता रहता है , हमे इसे रोकना है तो उसके कारणों पर जाना होगा उन्हें ख़त्म करना होगा ....

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