Sunday, April 21, 2013

संत और समाज :संत समाज से एक निवेदन

संत समाज से निवेदन : 

 जब समाज कि बीमारियाँ समाज खुद ठीक न कर पाए , सरकार से कोई मतलब नहीं हो वो तो जनता का धन इटली भेजने में लगी हो या मुस्लिम तुस्टीकरण में लगी हो , परिवार अपने बच्चों के क्रिया कलापों पर ध्यान न दे प् रहे हों , मूवी , टीवी और इन्टरनेट मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता परोसने में लगे हो ....तो कौन आगे है ?? 

समाज को कौन सुधारे ?? समाज इतना गिर जायेगा तो धर्म की हानि तो निश्चित ही है ...और धर्म की हानि का मतलब देश का नाश .. ऐसे विकट समय में सिर्फ संत समाज से ही उम्मीद की जा सकती है वो समाज में सुधर लायें आज देश का समाज पतन की ओर है .

.पाश्चात्य सभ्यता का अन्धानुकरण करके युवा वर्ग ना केवल स्वयं को हानि पहुंचा रहा है बल्कि समाज में ऐसे विकृत दिमाग वाले लोग कैंसर की तरह फैलते जा रहे है .

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इस कठिन समस्या का निवारण सिर्फ संत समाज ही कर सकता है . जैसे मुस्लिम काल में संतो ने हिंदुयों को "भक्ति आन्दोलन " चलाकर बचाया था वैसे ही आज भी समाज को सुधारने के लिए संतो को आगे आना होगा . सभी शंकराचार्य , महामंडलेश्वर , महंत , स्वामी , योग गुरु आगे आयें और पतन की ओर अग्रसर इस समाज ,परिवार के मूल्यों की रक्षा करें . ये देश, धर्म और समाज आपका सदा ऋणी रहेगा . 

 -चन्द्र भाल सिंह

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